भाजपा ने दूसरे राज्यों के लोगों को वोटर बनाने के लिए 30,000 नाम जमा किए हैं
कोलकाता। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की नेत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए नए एप्लीकेशन फॉर्म या फॉर्म 6 जमा करने में भारी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। हालांकि उन्होंने पहले भी मुख्यमंत्री रहते हुए ज्ञानेश कुमार को एसआईआर पर कई पत्र लिखे थे, लेकिन तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन के तौर पर यह उनका पहला लेटर है। जहां तृणमूल कांग्रेस नेत्री ने दावा किया है कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए शक के दायरे में बहुत बड़ी संख्या में एप्लीकेशन जमा किए जा रहे हैं। बंगाल की वोटर लिस्ट में बाहरी लोगों के नाम शामिल करने की कोशिश की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।
पत्र में ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि वोटर लिस्ट में एसआईआर के ज़रिए लाखों लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और साथ ही बड़ी संख्या में नए आवेदन जमा किए जा रहे हैं, जो एक सोची-समझी साजि़श की ओर इशारा करता है। उनके मुताबिक, ऐसे लोगों को वोटर के तौर पर शामिल करने की कोशिश की जा रही है जिनका बंगाल से कोई असली कनेक्शन नहीं है।
उन्होंने आगे दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही निर्देश दे चुका है कि वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने या हटाने से जुड़े दावों और आपत्तियों का निपटारा ज्यूडिशियल अधिकारियों के ज़रिए किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अगर उस स्थिति में करीब 30 हज़ार नए फार्म 6 एप्लीकेशन सीधे स्वीकार किए जाते हैं, तो यह कानून के खिलाफ होगा। 27 मार्च को जारी एक मेमोरेंडम का हवाला देते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉमिनेशन फाइल करने के आखिरी दिन तक फार्म 6 या फार्म 8 के ज़रिए वोटर लिस्ट में बदलाव की इजाज़त देना सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और लागू कानूनी ढांचे के खिलाफ है।
पत्र के आखिरी हिस्से में संविधान के आर्टिकल 324 का जि़क्र करते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग कोई भी गैर-कानूनी कार्रवाई नहीं कर सकता। उन्होंने असली स्थिति को देखते हुए तुरंत दखल देने की अपील की ताकि लोगों के वोट देने के अधिकार की रक्षा हो सके।
इत्तेफ़ाक से, तृणमूल के महा सचिव अभिषेक बनर्जी सोमवार शाम को राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के ऑफि़स गए थे। सीईओ के ऑफि़स से बाहर आकर अभिषेक ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोग सोमवार को फार्म-6 से भरे बैग लेकर कमीशन में घुसे थे। इसका मकसद बिहार और उत्तर प्रदेश के वोटरों को पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में शामिल करना था। उन्होंने चीफ़ इलेक्शन ऑफि़सर मनोज अग्रवाल को चुनौती देते हुए कहा कि वे सीईओ के ऑफि़स का सीसीटीवी फुटेज जारी करें। अभिषेक ने ऑफि़स में घुसते समय सीईओ के ऑफि़स को बताया कि एक बड़ी चोरी का पता चला है। वह कुछ देर बाद बाहर आ गए। उसके बाद उन्होंने सीईओ के ऑफि़स के बाहर प्रेस कॉन्फ्ऱेंस की और कमीशन पर आरोप लगाए। तृणमूल के महासचिव ने आरोप लगाया कि बीजेपी पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में राज्य के बाहर के वोटरों को शामिल करके उनके वोट पक्के करने की कोशिश कर रही है।
फार्म-6 का इस्तेमाल वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए किया जाता है। इस फ़ॉर्म का इस्तेमाल मुख्य रूप से दो तरह के एप्लिकेंट करते हैं। एक, जो पहली बार वोटर बनने के लिए अप्लाई कर रहे हैं। दो, जो एक लोकसभा या विधानसभा सीट से दूसरी में अपना घर बदल रहे हैं। उम्र और घर के प्रूफ के तौर पर ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स के साथ यह फॉर्म भरकर जमा करना वोटर के तौर पर रजिस्टर करने के लिए एक ज़रूरी स्टेप है।